← पिछला पाठ पाठ 6 अगला पाठ →

पाठ 6: बहिर्जात बल एवं भू-आकृतियाँ

Exogenetic Forces, Fluvial, Glacial, Aeolian & Karst Landforms | UPSC | UPPSC | NCERT

भू-आकृति विज्ञान

बहिर्जात बल (Exogenetic Forces) व अनाच्छादन

पृथ्वी के धरातल के ऊपर कार्य करने वाले बलों को बहिर्जात बल कहते हैं। इन बलों का मुख्य ऊर्जा स्रोत सूर्य (सौर ऊर्जा) और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण है। अंतर्जात बल जहाँ धरातल पर विषमताएं (पर्वत, पठार) बनाते हैं, वहीं बहिर्जात बल इन विषमताओं को काटकर समतल करने का प्रयास करते हैं।

इन बलों की सम्मिलित प्रक्रिया को अनाच्छादन (Denudation - आवरण हटाना) कहा जाता है, जिसमें मुख्य रूप से तीन क्रियाएं शामिल हैं:

  • अपक्षय (Weathering): चट्टानों का अपने ही स्थान पर टूटना-फूटना (स्थैतिक क्रिया)।
  • अपरदन (Erosion): टूटे हुए पदार्थों का जल, पवन या हिमनद द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाना (गतिशील क्रिया)।
  • वृहद क्षरण (Mass Wasting): गुरुत्वाकर्षण के कारण चट्टानी मलबे का ढाल के सहारे नीचे गिरना (जैसे- भूस्खलन/Landslide)।
बहिर्जात बल

1. बहिर्जात बल (Exogenetic Forces)

धरातल के ऊपर कार्य करने वाले बलों को बहिर्जात बल कहते हैं। इसमें मुख्यत: अपक्षय और अपरदन शामिल हैं।

2. नदियों के कार्य (Fluvial Landforms)

नदियाँ अपनी तीन अवस्थाओं में विसर्प (Meanders), गोखुर झील और डेल्टा बनाती हैं।

3. हिमनद व पवन के कार्य

  • यू-आकार की घाटी: हिमनद द्वारा काटी गई घाटियाँ।
  • बरखान (Barchans): पवन द्वारा निर्मित अर्धचंद्राकार रेत के टीले।
  • छत्रक शिला: मरुस्थलों में पवन के घर्षण से बनी मशरूम आकृति।