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पाठ 5: अंतर्जात बल, विवर्तनिकी एवं ज्वालामुखी

Endogenetic Forces, Continental Drift, Plate Tectonics & Volcanism | UPSC | UPPSC | NCERT

भू-आकृति विज्ञान

पृथ्वी के बल (Geomorphic Forces): एक विहंगावलोकन

पृथ्वी का धरातल हमेशा परिवर्तनशील है। इसके स्वरूप को बदलने वाले बलों (Forces) को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:

  • अंतर्जात बल (Endogenetic Forces): ये बल पृथ्वी के आंतरिक भाग (मैंटल की संवहन धाराओं) से उत्पन्न होते हैं। ये धरातल पर विषमताएँ (पर्वत, पठार, भ्रंश) पैदा करते हैं।
  • बहिर्जात बल (Exogenetic Forces): ये धरातल के ऊपर कार्य करते हैं (नदी, पवन, हिमनद)। इनका मुख्य कार्य अंतर्जात बलों द्वारा बनाई गई विषमताओं को समतल करना (अनाच्छादन) है।
विवर्तनिकी

1. वेगनर का सिद्धांत एवं प्लेट विवर्तनिकी

अल्फ्रेड वेगनर ने 1912 में महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत दिया। कार्बोनिफेरस युग में सभी महाद्वीप 'पेंजिया' (Pangea) के रूप में जुड़े थे।

  • प्लेट विवर्तनिकी: पृथ्वी का स्थलमंडल 7 प्रमुख और कई छोटी प्लेटों में बंटा है।
  • नजका प्लेट: दक्षिण अमेरिका और प्रशांत प्लेट के बीच स्थित है।

2. ज्वालामुखी (Volcanoes)

ज्वालामुखी का नाम देश / स्थान
स्ट्रोम्बोली इटली (भूमध्य सागर का प्रकाश स्तंभ)
बैरन द्वीप भारत (एकमात्र सक्रिय)