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पाठ 8: तटीय स्थलाकृतियाँ, विश्व के तट व भौतिक विभाजन

Coastal Landforms, Global Straits & Physiographic Divisions of India/UP | UPSC | UPPSC

भू-आकृति विज्ञान

परिचय (Introduction)

पिछले पाठों में हमने अंतर्जात और बहिर्जात बलों (नदी, पवन, हिमनद, भूमिगत जल) द्वारा निर्मित स्थलाकृतियों का अध्ययन किया। इस पाठ में हम स्थलाकृतियों के अंतिम प्रमुख कारक समुद्री लहरों (Sea Waves) के कार्यों और विश्व के प्रमुख तटों का अध्ययन करेंगे। इसके पश्चात हम विश्व की जलसंधियों, और भारत व उत्तर प्रदेश के भौतिक विभाजन (Physiographic Divisions) का गहन विश्लेषण करेंगे।

तटीय स्थलाकृतियाँ

1. समुद्री लहरों के कार्य एवं विश्व के तट

समुद्री लहरों के अपरदन और निक्षेपण से कई स्थलाकृतियां बनती हैं।

  • अपरदनात्मक: समुद्री भृगु (Cliff), कंदरा, मेहराब, स्टैक।
  • फियोर्ड तट: हिमनद घाटियों के डूबने से (जैसे नॉर्वे)।

2. उत्तर प्रदेश व भारत का भौतिक विभाजन

उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से तीन भू-आकृतिक भागों में बांटा गया है: भाबर-तराई, गंगा का मैदान, और दक्षिण का पठारी क्षेत्र।

क्षेत्र विशेषता
भाबर क्षेत्र कंकड़-पत्थर युक्त, नदियां अदृश्य हो जाती हैं।